मेरा उपन्यास “घर आ जा परदेसी” समाज को संदेश दे रहा है कि अगर कोई शरीफ, सज्जन, भला पुरुष विपरीत परिस्थितियों की वजह से अपने जीवन को सही दिशा में नहीं ले जा पा रहा है, तो उसके परिवार को उसके भलेपन के संदर्भ में उसे प्यार और समर्थन देना चाहिए, उसके जीवन को सुगम बनाना चाहिए। अगर कोई महिला प्रेमी है, तो उसका प्यार मीराबाई जी का जैसे गिरधर के प्रति था, वैसा निस्वार्थ और कामनारहित होना चाहिए। महिला पत्नी है, तो उसको रुक्मणी जी की तरह अपने पति के प्रति निस्वार्थ भाव से, बिना कुछ अपेक्षा रखे हुए, अपने पतिव्रत धर्म का अच्छे से पालन करना चाहिए।
मेरे उपन्यास “घर आ जा परदेसी” में दोनों महिलाओं ने दोनों चरित्र बहुत अच्छे से निभाए हैं। खुद दुख सहते हुए पति और प्रेमी को हमेशा सुख और सुख का अनुभव करवाया है। दोनों महिलाओं ने आपस में बैर-भाव नहीं रखा, मित्रता का भाव रखते हुए एक ही पुरुष, जो एक का पति था और एक का प्रेमी, उसको संभालना है।
संदेश यही है कि एक स्वस्थ समाज की मजबूत नींव केवल महिलाएँ ही होती हैं, जिनके समर्पण, प्यार, सद्गुणों और निस्वार्थ भावना से घर, परिवार, समाज — सब कुछ खुशहाल रहता है।
LITERARY COLLECTIONS / Women Authors
Ghar Aaja Pardesi
₹299.00
By: Shuchita Bansal
ISBN: 9789371550048
Language: Hindi
Pages: 167
Category: LITERARY COLLECTIONS / Women Authors
Delivery Time: 7-9 Days



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